Thursday, November 18, 2010

घर से चिठिया एक आई है

घर से चिठिया एक आई है 

घर से चिठिया एक आई है ,
अम्मा ने कुशल क्षेम मंगाई है |

लिखती हैं पाला  सारी फसल लूट गया ,
इसी करण पारो का बंधा रिश्ता टूट गया |
श्यामा गाय अपनी अब दूध नहीं देती है ,
ऊपर   से   दूना    चारा   खा   लेती   है  |
जीने की अब तो बस होती रश्म अदाई है|
घर से चिठिया  एक आई  है,
अम्मा  ने कुशल- क्षेम मंगाई है | 


बापू को दमा का ज्वार फिर चढ़ आया , 
पखवाड़ा बीत गया दाना तक नहीं खाया |
ऊपर से पीने  को दूध नहीं मिलता है 
अपना तो जीवन यह कण-कण कर  गलता |
भेज देना लल्ला लिखी जो दवाई है |
घर से चिठिया  एक आयी है |
अम्मा ने कुशल-क्षेम मंगाई है|
                   कवि  सुशील दीक्षित विचित्र  

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