रमुआ को होरी को
कल्लू को डोरी को
मुबारक हो नया साल
मुबारक तो पिछला भी था
मगर कई घाव दे गया
सादे से जीवन में
सौ घुमाव दे गया
तो रानी को महरी को
लुटी गुलदुपहरी को
मुबारक हो नया साल
सपने पहले भी थे
लेकिन सब बिखर गए
स्वप्न भंग होते ही
जानें वे किधर गए
तो छप्पर को छानी को
असफल कहानी को
मुबारक हो नया साल
कल्लू को डोरी को
मुबारक हो नया साल
मुबारक तो पिछला भी था
मगर कई घाव दे गया
सादे से जीवन में
सौ घुमाव दे गया
तो रानी को महरी को
लुटी गुलदुपहरी को
मुबारक हो नया साल
सपने पहले भी थे
लेकिन सब बिखर गए
स्वप्न भंग होते ही
जानें वे किधर गए
तो छप्पर को छानी को
असफल कहानी को
मुबारक हो नया साल