Friday, February 10, 2012

सिर्फ अपने दिखें मत विरानें दिखें 
सिर्फ गुलशन दिखे न वीराने दिखें
बंद पलकों पे डेरा पड़े नीद का 
और सपने दिखें तो सुहानें दिखें  

धुप अंधेरों मैं था खड़ा 
चाह पाले कई चाह में
आस विश्वास की लौ जली 
रोशनी हो गई राह में 
                नेह की चांदनी यूँ झरी 
                भीगता मन हमारा रहा
सेहरा सेहरा खिले फूल फिर,
वादियाँ गुनगुनानें लगीं 
थक के ऊँघी नदी को हवा 
लोरियां गा सुलाने लगीं  

Wednesday, February 8, 2012

.........तब चले जाना



कुछ गजल कुछ गीत की बातें 
दोस्त कर लें तब चले जाना 

दूर तक फैला समुन्दर है ,   
पर  समुन्दर से बड़ी उलझन हमारी 
धूप कहती साथ हम तुम्हारा ,
चांदनी पर बन गयी दुश्मन हमारी

नीति की कुछ रीति की बातें 
कहर कर दें तब चले जाना 

क्षितिज के उस पर तक है धुंध 
धुंध में गुम हो गया है प्यार का चेहरा
और चेहरे  पर मकड़िया बुन रहीं जाला
वेदना का हो गया रंग और भी गहरा 

प्रेम की कुछ प्रीति की बातें 
जहर भर दें तब चले जाना   
कुछ गजल कुछ गीत की बातें .......