कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है ?
मामा का कर्ज सारा वेबाक है ?
बाबा की गठिया का दर्द अब कैसा है ?
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है ?
चाचा की ताऊ से बोलचाल है ?
भाई की भाभी से उतनी ही पटती है ?
बहुओं की बातों से सासू क्यों खटती है ?
बिंदिया के रिश्ते की बात कहीं और चली ?
कैसी अब लगती है सोनू की चोर लली ?
मामा का कर्ज सारा वेबाक है ?
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है ?
बाबा की गठिया का दर्द अब कैसा है ?
साहू का ईमान धर्म क्या अब भी पैसा है ?
बडकू का लड़का क्या वैसा ही नटखट है ?
ननद और भौजाई में वैसी ही खटपट है ?
मोहन की लाठी में वही धाक है |
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है ?
छोटे ने आमों का बाग जो लगवाया ,
एक अरसा बीत गया बौर तक नहीं आया ?
आमों की छोडो अब कोई बात और कहो |
गाँव की नदियाँ में थोड़ी देर और बहो |
अपने गाँव शेष अभी छूतपाक है !
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है |
कवि सुशील दीक्षित विचित्र
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