नाचे प्रकृति पहन कर पीली चुनर नई नई
छाया चारों ओर वसन्त , की सरसों फूल गयी
कामदेव ने जाल रचे हैं , युवा मन भरमाये
नीली झील सरीखी आँखों में वह डूबा जाये
चढ़ा प्रेम का सब पर खुमार ,नशीली बयार वही
छाया चारो और वसन्त की सरसों फूल गयी