Wednesday, February 8, 2017

छाया चारों ओर वसन्त

नाचे प्रकृति पहन कर पीली चुनर नई नई
छाया चारों ओर वसन्त , की सरसों फूल गयी 

कामदेव ने जाल रचे हैं , युवा मन भरमाये 
नीली झील सरीखी  आँखों  में वह डूबा जाये 
चढ़ा प्रेम का सब पर खुमार ,नशीली बयार वही 
छाया चारो और वसन्त की सरसों फूल गयी