आ गयीं , कैसी हवाएं आ गयीं
शीत की पढ़तीं ऋचाएं आ गयीं
आ गयीं कैसी हवाएं आ गयीं
यह जमा सकतीं शिराएँ हैं संभल कर
यह नशीली यातनाएं हैं संभल कर
बर्फ के खंजर उठाये घूमतीं हैं
यह हिमालय की सुताएं हैं संभल कर
डाल कर कोहरे की चादर सूर्य पर
आ गयीं यह बिन बुलाये आ गयीं
आ गयीं कैसी हवाएं आ गयीं
इन हवाओं का कहर पर झेलना है
कपकपाता एक डर पर झेलना है
हैं ठिठुरती रात भर रातें , दिशाएँ
फ्रिज हुआ सारा शहर पर झेलना है
रीति इन पागल हवाओं की पुरानी
तोड़तीं सब वर्जनाएं आ गयीं
आगयी कैसी हवाएँ आ गयीं
इन हवाओं का कहर पर झेलना है
कपकपाता एक डर पर झेलना है
हैं ठिठुरती रात भर रातें , दिशाएँ
फ्रिज हुआ सारा शहर पर झेलना है
रीति इन पागल हवाओं की पुरानी
तोड़तीं सब वर्जनाएं आ गयीं
आगयी कैसी हवाएँ आ गयीं