Tuesday, December 8, 2015

मानव मूल्यों का हम मिलकर क्षरण नहीं होने देंगे 
सब मिल कर मानवाधिकार का हनन नहीं होनें देंगे

 लेकिन पहले हम यह समझे क्या अधिकार हमारे हैं 
 जिन अधिकारों पर कुछ लोगयहां कुंडली मारे हैं 
स्वतंत्रता अधिकार  सभी का , हक़ जिन्दा रहने का भी 
अपना दर्द, शिकायत अपनी   राजा  से कहने का भी 
 भ्रष्टाचार मुक्त शासन  हो कोई भी भयभीत न हो
न्याय सभी को  मिले कभी भी अन्यायी की जीत  न हो
भोजन का अधिकार सभी को  कोई प्यासा  नहीं मिले
विद्यालय में एकलव्य को  कभी हताशा नहीं   मिले
कोई भी  यदि वंचित हो तो वंचित हो दुविधाओं से
लेकिन  वंचित नहीं रहे वो  मूलभूत  सुविधाओं से
जनता के इन अधिकारों पर कोई यदि डाका  डाले
झोपड़ियों पर बिजली बाले छा जाएँ  बादल काले
मजदूरों का बहे  पसीना लेकिन उसका दाम  न हो
दरबारों में झूठ चले पर  सच्चाई का नाम न हो
तब अपने इस अधिकारों की खातिर होगे खड़े नहीं
जाति  वर्ग से ऊचें उठ कर होंगे यदि हम बड़े नही
तो मानव के अधिकारों पर डाके पड़ते जाएंगे
अत्याचारी शोषण वाले गीत सुनाते जाएंगे
 अत्याचारों को मानवता का कफ़न नहीं होने देना
सब मिल कर मानवाधिकार का हनन नहीं होने देना









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Wednesday, November 25, 2015

एक तेरा सहारा रहा

  एक तेरा सहारा रहा

बेसहारे सहारे हुए
 एक तेरा सहारा रहा ।

धुप अंधेरों मैं था खड़ा 
चाह पाले कई चाह में
आस विश्वास की लौ जली 
रोशनी हो गई राह में 
                नेह की चांदनी यूँ झरी 
                भीगता मन हमारा रहा

सेहरा सेहरा खिले फूल फिर,
वादियाँ गुनगुनानें लगीं 
थक के ऊँघी नदी को हवा 
लोरियां गा सुलाने लगीं
     एक पपीहे की बेचैनियाँ
     देख रोता किनारा रहा                

बोले काका

ध्वजा पताका
बोले काका
राजनीति बस 
डाका डाका 
छप्पर छानी 
फाका फाका 
हैं चुनाव क्या 
हाका हाका  
चलो चलो चलो        
हाँक लगाओं 
की कोई आ रहा है दबे पाँव 
खामोशी से , चुपचाप 
आते ही तहसनहस कर डालेगा खेत 
उजाड़ देगा बाग़ , फूंक देगा बाजार 
चारो और फैला देगा बर्बादी , 
और तब बहुत मुश्किल हो जाएगा  बचा पाना आजादी 

Sunday, July 26, 2015

बरसो भी मेघा

बहुत हो गया उमड़ घुमड़
अब बरसो भी मेघा ।

बिन बरसे ही निकल गए
तो फिर  कैसे  मेघा
यार बरसने के तुम भी
लोगे पैसे  मेघा
खाली है किसान की थाली
परसो भी मेघा

ताल तलैया पोखर नदियाँ
सब के सब प्यासे
प्यासे पनघट प्यासे मेंले
प्यासे जनवासे
बहुत हुआ अब छोड़ो गुस्सा
हर्षो भी मेघा ।