एक अधूरा गीत लिखा है
तुम आओ पूरा हो जाये
तृप्ति लिखा है , प्यास लिखा है
पतझर संग मधुमास लिखा है
दुःख की घनी बस्तियां लिख दीं
खुशियों को वनवास लिखा है
ऐसा चाह रहा कुछ लिखना
सदियों सदियों हर युग गाये
सुशील विचित्र
तुम आओ पूरा हो जाये
तृप्ति लिखा है , प्यास लिखा है
पतझर संग मधुमास लिखा है
दुःख की घनी बस्तियां लिख दीं
खुशियों को वनवास लिखा है
ऐसा चाह रहा कुछ लिखना
सदियों सदियों हर युग गाये
सुशील विचित्र
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