Wednesday, November 25, 2015

एक तेरा सहारा रहा

  एक तेरा सहारा रहा

बेसहारे सहारे हुए
 एक तेरा सहारा रहा ।

धुप अंधेरों मैं था खड़ा 
चाह पाले कई चाह में
आस विश्वास की लौ जली 
रोशनी हो गई राह में 
                नेह की चांदनी यूँ झरी 
                भीगता मन हमारा रहा

सेहरा सेहरा खिले फूल फिर,
वादियाँ गुनगुनानें लगीं 
थक के ऊँघी नदी को हवा 
लोरियां गा सुलाने लगीं
     एक पपीहे की बेचैनियाँ
     देख रोता किनारा रहा                

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