तुमने ही तोड़ दी कसम,
मैंने तो कुछ नहीं कहा
प्यार एक भरम मात्र है , सब को यह ठीक से पता
फिर भी जब प्रेम उमड़ता ,वृक्षों से लिपटती लता
तुमने जब मिटा दिए भरम ,मैंने तब क्या नहीं सहा
प्यार खेल भरे पेट का , प्यार शीत घाम का सफ़र
प्यार महज ख़ूबसूरत लफ्ज , प्यार सिर्फ धोखे का घर
आंसू को लाज ना शरम ,आंसू का काम था , वहा
कुमार विचित्र
मैंने तो कुछ नहीं कहा
प्यार एक भरम मात्र है , सब को यह ठीक से पता
फिर भी जब प्रेम उमड़ता ,वृक्षों से लिपटती लता
तुमने जब मिटा दिए भरम ,मैंने तब क्या नहीं सहा
प्यार खेल भरे पेट का , प्यार शीत घाम का सफ़र
प्यार महज ख़ूबसूरत लफ्ज , प्यार सिर्फ धोखे का घर
आंसू को लाज ना शरम ,आंसू का काम था , वहा
कुमार विचित्र
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