Wednesday, February 8, 2012

.........तब चले जाना



कुछ गजल कुछ गीत की बातें 
दोस्त कर लें तब चले जाना 

दूर तक फैला समुन्दर है ,   
पर  समुन्दर से बड़ी उलझन हमारी 
धूप कहती साथ हम तुम्हारा ,
चांदनी पर बन गयी दुश्मन हमारी

नीति की कुछ रीति की बातें 
कहर कर दें तब चले जाना 

क्षितिज के उस पर तक है धुंध 
धुंध में गुम हो गया है प्यार का चेहरा
और चेहरे  पर मकड़िया बुन रहीं जाला
वेदना का हो गया रंग और भी गहरा 

प्रेम की कुछ प्रीति की बातें 
जहर भर दें तब चले जाना   
कुछ गजल कुछ गीत की बातें ....... 

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