Saturday, November 13, 2010

कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है 


कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है ? 
चाचा की ताऊ से बोलचाल है ?   

 भाई  की भाभी से उतनी ही  पटती  है ? 
बहुओं की बातों से सासू क्यों खटती है ?
बिंदिया के रिश्ते की बात कहीं और चली ? 
कैसी अब लगती है सोनू की चोर लली ?


मामा का कर्ज सारा वेबाक है ?
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है ?      

बाबा की  गठिया का दर्द अब कैसा है ?
साहू का ईमान धर्म क्या अब भी पैसा है ?
 बडकू का लड़का क्या वैसा ही नटखट है ?  
 ननद और भौजाई  में वैसी ही खटपट है ?

 मोहन की लाठी में वही धाक है |  
कहिये तो घर पर सब  ठीकठाक है ?

छोटे ने आमों का बाग जो लगवाया ,
एक अरसा बीत गया बौर तक नहीं आया ? 
आमों की छोडो अब कोई बात और कहो | 
गाँव की नदियाँ में थोड़ी देर और बहो |

अपने गाँव शेष अभी छूतपाक है !
कहिये तो घर पर सब ठीकठाक है |
             कवि सुशील दीक्षित विचित्र 

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